Episode 3 : सिरमौर का इतिहास History of Sirmour
सिरमौर का इतिहास History Of Sirmaur
सिरमौर (Sirmaur)
जिले के रूप में गठन 15 अप्रैल, 1948 ई० को हुआ मुख्यालय नाहन है | सिरमौर का क्षेत्रफल 2825 वर्ग किलोमीटर है | सिरमौर जिला हिमाचल प्रदेश के दक्षिण भाग में स्थित है | सिरमौर जिले के पूर्व में उत्तराखंड, पश्चिम और दक्षिण पश्चिम में हरयाणा, उत्तर में सोलन और शिमला तथा दक्षिण में हरियाणा और उत्तराखंड की सीमाएं लगती है |
इतिहास
- सिरमौर का नामकरण - सिरमौर के प्राचीन निवासी कुलिंद थे | कुलिंद राज्य मौर्य साम्राज्य के शीर्ष पर स्थित था जिस कारण इसे शिरमौर्य की संज्ञा दी गई जो कालांतर में सिरमौर बना |
- सिरमौर रियासत की स्थापना - 'तारीख -2 रियासत सिरमौर' रंजौर सिंह की पुस्तक के अनुसार सिरमौर रियासत का प्राची सुलोकिना था | इसकी स्थापना 1139 ई० में जैसलमेर के राजा सालवाहन के पुत्र राजा रसालु ने की | उसकी राजधानी सिरमौरी ताल थी |
- माहे प्रकाश (1199-1217 ई०) - शुभंश प्रकाश की 1199 ई० में मृत्यु होने के बाद माहेप्रकाश राजा बना | उनके शासनकाल सिरमौर की सीमाएं गढ़वाल, भागीरथी, श्रीनगर नारायणगढ़ तक फ़ैल गई |
- उदित प्रकाश (1217-1227 ई०) - उदित प्रकाश ने 1217 ई० में सिरमौर की राजधानी राजवन से कालसी में स्थानांतरित की |
- कौल प्रकाश (1227-1239 ई०) - कौल प्रकाश ने जुब्बल, बालसन और थरोच को अपने अधीन कर उसे अपनी जागीर बनाया |
- सुमेर प्रकाश (1239-1248 ई०) - सुमेर प्रकश ने क्योंथल की जागीर रतेश को अपने अधीन कर उसे सिरमौर रियासत की राजधानी बनाया |
- सूरज प्रकाश (1374-1386 ई०) - सूरज प्रकाश ने जुब्बल, बालसन,कुमारसेन, घुंड, सारी, ठियोग, रावी और कोटगढ़ को अपने अधीन कर लगान वसूल किया |
- भक्त प्रकाश (1374-1386 ई०) - भक्त प्रकाश फिरोजशाह तुगलक का समकालीन था | भक्त प्रकाश के शासनकाल में 1379 ई० में फिरोजशाह तुगलक ने सिरमौर रियासत को अपनी जागीर बनाया |
- वीर प्रकाश (1388-1398 ई०) - वीरसेन ने हाटकोटी को अपनी राजधानी बनाया | उन्होंने पब्बर नदी के किनारे भगवती दुर्गा का मंदिर बनाया | वीरप्रकाश ने 'रावीनगढ़ किला' बनवाया |
- राजधानी का स्थानांतरण - नेकट प्रकाश (1398-1414 ई०) ने रियासत की राजधानी गिरी नदी के तट पर 'नेरी गावं' में स्थपित की | गर्वप्रकाश (1414-1432 ई०) ने रियासत की राजधानी "नेरी से जोगड़ी किले" में स्थानांतरित की | ब्रहा प्रकाश (1432-1446 ई०) ने रियासत की राजधानी पच्छाद के "देवठल" में स्थापित की | धर्म प्रकाश (1538-1570 ई०) ने रियासत की राजधानी "देवठल" से बदलकर पुनः कालसी में स्थापित की |
- दीप प्रकाश (1570-1585 ई०) - दीप प्रकाश ने सिरमौर के त्रिलोकपुर में 1573 ई० में बाला सुंदरी का मंदिर बनवाया |
- कर्म प्रकाश (1616-1630 ई०) - कर्म प्रकाश ने बाबा बनवारी दासके परामर्श से 1621 ई० में सिरमौर रियासत की राजधानी "कालसी से नाहन" स्थानांतरित की | कर्म प्रकाश ने नाहन शहर और नाहन किले की नीवं रखी |
- मन्धाता प्रकाश (1630-1654 ई०) - मन्धाता प्रकाश शाहजंहा का समकालीन था |
- मेदनी प्रकाश (1678-1694 ई०) - मेदनी प्रकाश के शासनकाल में गुरुगोबिंद सिंह नाहन और पौंटा आए | पौंटा साहिब में गुरुगोबिंद सिंह 1684-1688 ई० तक रहे और भगानी साहिब का युद्ध लडा | मेदनी प्रकाश ने नाहन में 1681 ई० में जगन्नाथ मंदिर का निर्माण करवाया |
- जगत प्रकाश (1773-1792 ई०) - जगत प्रकाश ने गुलाम रोहिल्ला को युद्ध में हराने के बाद कटासन देवी का मंदिर 1785 ई० में बनवाया |
- धर्म प्रकाश (1792-1796 ई०) - सिरमौर के राजा धर्म प्रकाश ने कहलूर के राजा महानचन्द की सहायता के लिए संसारचंद और हण्डूर रियासत के विरुद्ध युद्ध लड़ा जिसमे 1796 ई० में उसकी मृत्यु हो गई |
- कर्म प्रकाश ( 1796-1815 ई०) - कर्म प्रकाश के शासनकाल में मेहता प्रेम सिंह बजीर की मृत्यु के बाद रियासत में घरेलू वद्रोह होने लगे | कर्म प्रकाश परिवार के साथ 1803 ई० में क्यारदा दून के "काँगड़ा किले " में रहने लगे | उन्होंने विद्रोह को दबाने के लिए गोरखों को आमंत्रित किया | अमर सिंह थापा के पुत्र ने 1809 ई० में, सिरमौर रियासत को अपने अधीन कर लिया |
- फ़तेह प्रकाश (1815-1850 ई०) - ब्रिटिश सेना ने जनरल मार्टिन्डेल के नेतृत्व में जातक दुर्ग से गोरखों की 21 मई, 1815 ई० को निकल दिया | कर्म प्रकाश के बड़े पुत्र फ़तेह प्रकाश को ब्रिटिश सरकार ने दिसंबर, 1815 ई० को राजा बनाया |
- शमशेर प्रकाश (1856-1898 ई०) - शमशेर प्रकाश ने 1857 ई० के विद्रोह में अंग्रेजों का साथ दिया | शमशेर शासनकाल में 1875 ई० में नाहन फाउंड्री, 1967 ई० में रानीताल बाग, 1868 ई० में नाहन म्युनिसिपल कमेटी की स्थापना हुई | 1808 ई० में लार्ड रिपन नाहन आए | जबकि 1885 ई० में लार्ड डफरिन नाहन आए | 1880 ई० में शमशेर प्रकाश ने अपने रहने के लिए शमशेर किला बनाया |
- अमर प्रकाश (1911-1933 ई०) - प्रथम विश्वयुद्ध में योगदान के लिए उन्हें ब्रिटिश सरकार ने 'महाराजा' और 'K.C.S.I' की उपाधि से अलंकृत किया | अमर प्रकाश ने अपनी पुत्री के नाम पर नाहन में 'महिमा पुस्तकालय' की स्थापना की जो हिमाचल प्रदेश का सबसे पुराना पुस्तकालय है | उन्होंने नाहन-काला आम्ब सड़क को 1927 ई० में पक्का करवाया |
- राजेंद्र प्रकाश (1933-1948 ई०) - राजेंद्र प्रकश सिरमौर के अंतिम शासक थे | राजेंद्र प्रकाश के समय सिरमौर प्रजामंडल की स्थापना 1937 ई० में और पझौता आंदोलन (1942 ई०) में हुआ | पझौता आंदोलन में "किसान सभा" का गठन हुआ जिसका सभापति लक्ष्मी सिंह तथा सचिव वैद्य सूरत सिंह को चुना गया | 13 मार्च, 1948 ई० को महाराज राजेंद्र प्रकाश के विलय पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए | सिरमौर 15 अप्रैल 1948 को हिमाचल प्रदेश का जिला बना |
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