बेटी पैदा होने पर मनाते है उत्सव, लाहुल स्पिती के पयूकर गांव की परम्परा
बेटी पैदा होने पर मनाते है उत्सव, लाहुल स्पिती के पयूकर गांव की परम्परा
News Source : Ajay banyal
जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति की गाहर घाटी में हालड़ा, कुस उत्सव के बाद गोची उत्सव मनाया जा रहा है। घाटी में बेटे के जन्म पर गोची उत्सव मनाने की परंपरा है। घाटी में प्यूकर एकमात्र ऐसा गांव है, जहां बेटियों के जन्म पर सदियों में गोची उत्सव मनाया जाता हैं।
घाटी में इस वर्ष चार से आठ फरवरी तक यहां गोची उत्सव मनाया गया। इस दौरान गांव के मुख्य देवता तंगजर की विशेष पूजा की गई। इसके बाद शाम को तीर-कमान का खेल खेला गया। साथ ही नृत्य कर जश्न मनाया गया। स्थानीय ग्रामीण छेरिंग टशी छरजिपा ने कहा कि गांव में बीते एक वर्ष में तीन बच्चों का जन्म हुआ है। इनमें दो लड़कियां और एक लड़का शामिल हैं। ऐसे में प्यूकर गांव के तीन घरों में गोची उत्सव मनाया गया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में लड़कियां अपनी मेहनत के बलबूते नई बुलंदियों को छू रही हैं। बेटा-बेटी एक समान है। प्यूकर में बेटे के साथ बेटी के जन्म पर गोची उत्सव का आयोजन कर परिवार के साथ पूरा गांव गर्व महसूस कर रहा है। इस दौरान उपायुक्त लाहौल-स्पीति पंकज राय ने प्यूकर गांव के गोची उत्सव में शिरकत की। उन्होंने गोची उत्सव मनाने वाले तीनों परिवारों के सदस्यों को सम्मानित किया। कहा कि बेटे के साथ बेटी के जन्म पर इस तरह की पहल सराहनीय है।
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