करेरी झील : शाहपुर का ताज, वहां कब जाएं , कैसे जाएं और साथ क्या क्या लेकर जाएं

 करेरी झील : शाहपुर का ताज

 

आइये जानते हैं आज शाहपुर का ताज कहलाने वाली करेइर झील के बारे में, वहां कब जाएं , कैसे जाएं और साथ क्या क्या लेकर जाएं

 


 
हिमाचल प्रदेश में घूमने हेतु कई पर्यटक स्थल, झीले, ग्लेशियर तथा पर्वत चोटिया है इनमे से एक है विश्व प्रसिद्ध करेरी झील यह झील एक ऐसा पर्यटक स्थल है जो पर्यटको को अपनी और सम्मोहित कर देता है यह झील जिला काँगड़ा के धर्मशाला में स्थित है यह ट्रैक धर्मशाला से 9 किमी दूर घेरा गांव से शुरू होता है तथा समुद्र तल से 2,934 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है

धर्मशाला स्वयं में ही एक पवित्र स्थान है जो बौद्ध धर्म के आद्यात्मिक गुरु दलाई लामा स्थान है यहाँ पर बौद्ध धर्म को मानने वालो के कई मंदिर बने हुए है वही इस जगह को देवताओ की भूमि भी माना गया है

करेरी झील(Kareri Lake) एक साफ़ पानी की एक खूबसूरत झील है जिससे देखने प्रति वर्ष देश विदेश से लाखो पर्यटक आते है तथा यहाँ आकर शान्ति का अनुभव करते है यह एक छोटा ट्रैक है जिसमे किसी भी उम्र के व्यक्ति आसानी से जा सकते है इस झील के चारो और आपको ढेर सारी वनस्पतियाँ तथा जड़ी बूटिया दिखाई पड़ती है ये पूरा क्षेत्र घने देवदार के वृक्षों से भरा हुआ है यहाँ के जंगलो में चिर और चिलगोजा पाइंस भरे हुए है जो देखने में बहुत सुन्दर दिखाई प्रतीत होते है

यहाँ पर बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पक्षी भी दिखाई देते है करेरी झील के निकट ही एक प्राचीन मंदिर भी बना हुआ है जो भगवान शिव और माता शक्ति को समर्पित है यह मंदिर एक पहाडी की छोटी पर बना हुआ है जहाँ से आप इस झील की मनमोहक खूबसूरती को निकट से देख सकते है इस झील का पानी वहाँ स्थित धौलाधार पर्वत में स्थित ग्लेशियर के पिघलने से आता है दिसम्बर से मार्च तक ये झील पूरी तरह से जम जाती है उस समय इस झील का आकर्षक देखने लायक होता है

करेरी झील(Kareri Lake) के लिए ट्रैकिंग धर्मशाला के घेरा गांव से शुरू होती है घेरा गांव धर्मशाला से लगभग 20 किमी की दूरी पर स्थित है जहाँ पहुचने में 1 से 2 घंटे तक का समय लग जाता है यह ट्रैक पहला ट्रैक करने वालो व अनुभवी ट्रैकर्स के लिए एक आदर्श ट्रैक है इस ट्रैक को किसी भी उम्र के व्यक्ति आसानी से कर सकते है बस ट्रैक को करने हेतु व्यक्ति को मानसिक व शारीरिक रूप से मजबूत होने व ट्रैक पूरा करने की इच्छाशक्ति होनी चाहिए

 

साथ ले जाने वाली वस्तुएँ

करेरी झील ट्रैक पर जाते समय आपको स्वयं सावधानी बरतने के साथ रोजाना के प्रयोग होने वाली जरूरत की चीजों को भी अपने साथ ले जाना आवश्यक होता है साथ ही आपको छोटी मोटी शारीरिक परेशानियों के लिए सर दर्द, पैट ख़राब व अन्य रोगो के उपचार हेतु फर्स्ट ऐड की चीजे व दवाइयां भी जरूर ले जानी चाहिए ताकि आवस्यकता अनुसार जरूरत के समय ये प्रयोग में लाई जा सके

 

वहाँ का मौसम प्रति घंटे के हिसाब से बदलता रहता है जिस कारण वहाँ ठण्ड भी अधिक रहती है इस कारण आपको ठण्ड व बारिश से बचाव हेतु रैनकोट, फुल स्लीव्स पतली जैकेट्स, मंकी कैप, ट्रैकिंग शूज, गर्म मोज़े, मफलर, तौलिए, धुप से बचाव हेतु अच्छे किस्म के चश्मे, कोल्ड क्रीम, लिप बाम, सनस्क्रीन लोशन, एल०ई०डी टॉर्च, गर्म पानी की बोतल, ट्रैकिंग पोल, सिरदर्द की दवाइयाँ जैसे क्रोसिन, डिस्प्रिन, कॉटन, बैंड-ऐड, मूव स्प्रे, गौज, क्रैप बैंडेज आदि चीजे है जो आपको ट्रैक पर जाते समय अपने साथ रखनी चाहिए, इनकी जरूरत आपको ट्रैक पर जाते वक्त कभी भी पड़ सकती है

 

करेरी लेक ट्रैक कैसे जाये

प्रथम दिवस: आपके पहले दिन के ट्रैक की शुरुवात घेरा से करेरी गांव तक होती है घेरा की दूरी धर्मशाला से 20 किमी पड़ती है तथा ऊंचाई समुद्र तल से 1870 मीटर है इस पूरे ट्रैक को पूरा करने में ट्रेकर्स को 8 घंटे तक का समय लग जाता है

 

इस पूरे ट्रैक पर आपको घने देवदार के पेड़ दिखाई पड़ते है जो इस ट्रैक की खूबसूरती को और बढ़ा देते हैवही ट्रैक के दौरान कई पुराने गांव, नदियाँ व पहाड़ भी देखने को मिलते है आप इन गाँवो में या टेंट में रूककर रात्रि विश्राम भी कर सकते है इस दिन का ट्रैक ज्यादा मुश्किल नहीं होता आप मौसम का लुत्फ़ उठाते हुए इस दिन का ट्रैक पूरा कर सकते है

दूसरा दिन: आपके दूसरे दिन का ट्रैक करेरी गांव से शुरू होता है करेरी झील तक जाता है ट्रैक के मध्य में आपको पाइन, ओक व रोडोडेंड्रोन के सुन्दर वृक्ष दिखाई पड़ते है जो आपके मन को प्रफ्फुलित करने के लिए क़ाफी होते है वही इस ट्रैक पर आपको कई लकड़ी के बने हुए पुलों को पार करके जाना होता है इन पुलों को करेरी गांव के लोगो द्धारा ही बनाया गया है

यह ट्रैक लगभग 14 किमी का होता है करेरी झील की ऊंचाई समुद्र तल 3,250 मीटर पड़ती है यह ट्रैक त्रिउंड पीक पर्वत के साथ साथ होते हुआ जाता है इस ट्रैक में पत्थर, चट्टानें व मिटटी से भरी सड़के मिलती है जिस पर चलना आपके लिए थोड़ा मुश्किल हो सकता है करेरी झील के पास की एक बेहद खूबसूरत मंदिर दिखाई पड़ता है वही मन्दिर के साथ में नदी भी दिखाई पड़ती है जो आपके रास्ते की सारी थकान मिटा देती है

झील पर पहुंचकर आप करेरी झील के पास ही तारो की छाँव में अपना टेंट लगा सकते है व रात भर यहाँ रुकने का आनंद ले सकते है 

तीसरा दिन: तीसरे दिन का ट्रैक आपका वापसी के लिए जाता है इस दिन आपको करेरी झील से करेरी गांव तक आना होता है करेरी झील से करेरी गांव तक कि कुल दूरी 15 किमी पड़ती है जिसमे आने में लगभग 6 घंटे तक का समय लग जाता है यह ट्रैक घने जंगलो के बीच से होकर आता है

नीचे की और आने पर ढलान पड़ती है जिस कारण आपको धीरे धीरे नीचे उतरने की सलाह दी जाती हैढलानों पर उतरते समय सारा जोर आपके घुटनो पर आ जाता है जिस कारण घुटने जाम होने की समस्या आ सकती है आप रात को करेरी गांव में भी विश्राम कर सकते है अन्यथा आप इसी दिन धर्मशाला के लिए वापस आ सकते है यहाँ आकर आपका ट्रैक पूरा हो जाता है यहाँ से आप अपने अपने गंतव्य को टैक्सी या सरकारी बस द्धारा वापस जा सकते है  

 

 



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